| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 3: अन्त्य लीला » अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार » श्लोक 46-47 |
|
| | | | श्लोक 3.12.46-47  | पूर्वे यबे शिवानन्द प्रभु - स्थाने आइला ।
तबे महाप्रभु ताँरे कहिते लागिला ॥46॥
“ए - बार तोमार येइ ह - इबे कुमार ।
‘पुरी - दास’ बलि’ नाम धरिह ताहार ॥47॥ | | | | | | | अनुवाद | | एक बार जब शिवानन्द सेना श्री चैतन्य महाप्रभु के निवास पर उनसे मिलने आये थे, तब भगवान ने उनसे कहा था, "जब यह पुत्र जन्म ले, तो इसका नाम पुरीदास रखना।" | | | | Once when Shivananda Sen met Sri Chaitanya Mahaprabhu at his place, Mahaprabhu told him, “When you have this son, name him Puri Das.” | | ✨ ai-generated | | |
|
|