श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.12.45 
छोट - पुत्रे देखि’ प्रभु नाम पुछिला ।
‘परमानन्द - दास’ - नाम सेन जानाइला ॥45॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने सबसे छोटे पुत्र का नाम पूछा और शिवानन्द सेना ने भगवान को बताया कि उसका नाम परमानंद दास है।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu asked the name of Shivananda Sen's youngest son, Shivananda Sen told his name as Parmananda Das.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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