श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.12.37 
पेटाङ्गि - गाय करे दण्डवत् नमस्कार ।
गोविन्द कहे , - ‘श्रीकान्त, आगे पेटाङ्गि उतार’ ॥37॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीकांत ने भगवान को प्रणाम किया, तब भी उन्होंने अपना कुर्ता और कोट पहना हुआ था। इसलिए गोविंद ने उनसे कहा, "हे श्रीकांत, पहले ये वस्त्र उतारो।"
 
When Srikanta offered his obeisances to Mahaprabhu, he was wearing his shirt and coat. So Govinda said to him, “O Srikanta, first take off your clothes.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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