पेटाङ्गि - गाय करे दण्डवत् नमस्कार ।
गोविन्द कहे , - ‘श्रीकान्त, आगे पेटाङ्गि उतार’ ॥37॥
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अनुवाद
जब श्रीकांत ने भगवान को प्रणाम किया, तब भी उन्होंने अपना कुर्ता और कोट पहना हुआ था। इसलिए गोविंद ने उनसे कहा, "हे श्रीकांत, पहले ये वस्त्र उतारो।"
When Srikanta offered his obeisances to Mahaprabhu, he was wearing his shirt and coat. So Govinda said to him, “O Srikanta, first take off your clothes.”
तात्पर्य
देवता के कमरे में शर्ट या कोट पहनकर प्रवेश करना या देवता को कुछ भी अर्पित करना निषिद्ध है। तंत्र में कहा गया है:
वस्त्रेणावृत-देहस्तु यो नरः प्रणमेद्ध धरिम
श्वित्री भवति मूढात्मा सप्त जन्मानि भाविनी
"जो कोई भी अपने शरीर के ऊपरी हिस्से पर वस्त्र पहने हुए देवता का सम्मान करता है और उनकी आज्ञा का पालन करता है, वह सात जन्मों तक कोढ़ी होने के लिए अभिशप्त है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥