श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.12.29 
ब्रह्मार दुर्लभ तोमार श्री - चरण - रेणु ।
हेन चरण - स्पर्श पाइल मोर अधम तनु ॥29॥
 
 
अनुवाद
आपके चरणकमलों की धूल ब्रह्माजी को भी प्राप्त नहीं हो सकती, फिर भी आपके चरणकमलों ने मेरे इस दीन शरीर को स्पर्श किया है।
 
"The dust of your feet is unattainable even to Brahma. Yet your feet have touched my lowly body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)