श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.12.23 
तेंहो कहे ,_“बाउलि, केने मरिस् कान्दिया? ।
मरुक आमार तिन पुत्र ताँर बालाइ लञा” ॥23॥
 
 
अनुवाद
शिवानंद सेना ने उत्तर दिया, "अरे पागल! क्यों व्यर्थ रो रही हो? नित्यानंद प्रभु को जो असुविधा हमने दी है, उसके लिए मेरे तीनों पुत्रों को मर जाने दो।"
 
Shivananda Sen replied, "You crazy girl, why are you crying in vain? Let our three sons die for the inconvenience we have caused to Nityananda Prabhu."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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