श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.12.13 
दत्त, गुप्त, विद्यानिधि, आर यत जन ।
दुइ - तिन शत भक्त करिला गमन ॥13॥
 
 
अनुवाद
वासुदेव दत्त, मुरारी गुप्त, विद्यानिधि और कई अन्य भक्त श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन करने गए। कुल मिलाकर उनकी संख्या दो या तीन सौ थी।
 
Vasudev Dutt, Murari Gupta, Vidyanidhi and many other devotees went to see Sri Chaitanya Mahaprabhu. Altogether there were two to three hundred people.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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