श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  3.12.127 
प्रभु कहे, - “द्वितीय - पाते बा ड़’ अन्न - व्यञ्जन ।
तोमाय आमाय आजि एकत्र करिब भोजनः ॥127॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "एक और पत्ते पर चावल और सब्जियां बिछा दो ताकि आज तुम और मैं साथ में दोपहर का भोजन कर सकें।"
 
Mahaprabhu said, “Spread another plate and put rice and vegetables in it, so that today both you and I can eat together.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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