श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  3.12.126 
अन्न - व्यञ्जनोपरि तुलसी - मञ्जरी ।
जगन्नाथेर पिठा - पाना आगे आने ध रि’ ॥126॥
 
 
अनुवाद
चावल और सब्जियों पर तुलसी के फूल रखे थे और भगवान के सामने केक, मीठे चावल और जगन्नाथ के अन्य प्रसाद रखे थे।
 
There were Tulsi buds on the rice and vegetables and in front of Mahaprabhu there was roti, kheer and other offerings of Jagannathji.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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