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श्लोक 3.12.126  |
अन्न - व्यञ्जनोपरि तुलसी - मञ्जरी ।
जगन्नाथेर पिठा - पाना आगे आने ध रि’ ॥126॥ |
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| अनुवाद |
| चावल और सब्जियों पर तुलसी के फूल रखे थे और भगवान के सामने केक, मीठे चावल और जगन्नाथ के अन्य प्रसाद रखे थे। |
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| There were Tulsi buds on the rice and vegetables and in front of Mahaprabhu there was roti, kheer and other offerings of Jagannathji. |
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