श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 118
 
 
श्लोक  3.12.118 
पण्डित कहे , - ‘के तोमारे कहे मिथ्या वाणी ।
आमि गौड़ हैते तैल कभु नाहि आनि’ ॥118॥
 
 
अनुवाद
जगदानंद पंडित ने उत्तर दिया, "आपको ये सब झूठी कहानियाँ कौन सुना रहा है? मैं बंगाल से कभी तेल नहीं लाया।"
 
Jagadananda Pandit said, "Who tells you these false stories? I never brought oil from Bengal."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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