श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  3.12.117 
जगन्नाथे देह’ ला दीप येन ज्वले ।
तोमार सकल श्रम ह - इबे सफले” ॥117॥
 
 
अनुवाद
"तेल को जगन्नाथ मंदिर में पहुँचा दो ताकि वह दीपों में जलाया जा सके। इस प्रकार तेल तैयार करने में तुम्हारा परिश्रम फलदायी होगा।"
 
"Give this oil to the Jagannath Temple so it can be used in the lamps. This way, your efforts to make the oil will be successful."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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