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श्लोक 3.12.117  |
जगन्नाथे देह’ ला दीप येन ज्वले ।
तोमार सकल श्रम ह - इबे सफले” ॥117॥ |
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| अनुवाद |
| "तेल को जगन्नाथ मंदिर में पहुँचा दो ताकि वह दीपों में जलाया जा सके। इस प्रकार तेल तैयार करने में तुम्हारा परिश्रम फलदायी होगा।" |
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| "Give this oil to the Jagannath Temple so it can be used in the lamps. This way, your efforts to make the oil will be successful." |
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