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अनुवाद
"क्या मैंने ऐसे ही सुख के लिए संन्यास लिया है? इस तेल को ग्रहण करने से मेरा सर्वनाश हो जाएगा, और तुम सब हँसोगे।"
"Did I take sanyas for such pleasure? Accepting this oil will destroy me and make you all laugh."
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं को कड़ा सन्यासी घोषित किया था। एक सन्यासी को किसी से भी मदद लेने की अनुमति नहीं होती है। एक मालिश करने वाला रखने और खुद को मालिश करवाने से यह संकेत मिलता है की वह दूसरों पर निर्भर हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु बहुत सख्ताई से इस सिद्धांत का पालन करना चाहते थे की अपने शारीरिक सुख के लिए किसी की मदद न ली जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥