श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 107
 
 
श्लोक  3.12.107 
एक - कलस सुगन्धि तैल गौड़ेते करिया ।
इहाँ आनियाछे बहु यतन करिया” ॥107॥
 
 
अनुवाद
“उन्होंने बंगाल में इसका एक बड़ा जग तैयार किया और बड़ी सावधानी से इसे यहां लाए हैं।”
 
“He has prepared a big pot of oil in Bengal and has brought it here with great care.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)