श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 12: श्री चैतन्य महाप्रभु एवं जगदानन्द पण्डित का प्रेम व्यवहार  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  3.12.105 
तबे प्रभु - ठाञि गोविन्द कैल निवेदन ।
‘जगदानन्द चन्दनादि - तैल आनियाछेन ॥105॥
 
 
अनुवाद
इसलिए गोविंदा ने श्री चैतन्य महाप्रभु से कहा, "जगदानंद पंडित कुछ सुगंधित चंदन का तेल लाए हैं।"
 
So Govinda said to Sri Chaitanya Mahaprabhu, “Jagadananda Pandit has brought some fragrant sandalwood oil.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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