यदि कोई अपने निर्धारित मंत्रों की गिनती पूरी नहीं कर पाता है, तो उसे आध्यात्मिक जीवन की रोगग्रस्त स्थिति में माना जाना चाहिए। श्रीला हरिदास ठाकुर को नाम आचार्य कहा जाता है। बेशक, हम हरिदास ठाकुर का अनुकरण नहीं कर सकते, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को एक निश्चित संख्या में मंत्रों का जाप करना चाहिए। कृष्ण चैतन्य आंदोलन में हमने न्यूनतम सोलह परिक्रमाएँ निर्धारित की हैं ताकि पाश्चात्य लोगों को बोझ महसूस न हो। इन सोलह परिक्रमाओं का जाप करना चाहिए और ज़ोर से करना चाहिए, ताकि व्यक्ति स्वयं को और अन्य लोगों को सुन सके।
