इति पुंसार्पिता विष्णौ भक्तिस चेन नव-लक्षणा
क्रियेत भगवत्यद्धा तन मन्ये 'धीतम उत्तमम्
कृष्ण के लिए भक्ति सेवा की नौ अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण श्रवणं कीर्तन है- श्रवण और जप। हरिदास ठाकुर इस विज्ञान को बहुत अच्छी तरह से जानते थे, और इसलिए उन्हें तकनीकी रूप से सर्व-शास्त्रधिती कहा जा सकता है। जिसने भी सभी वैदिक शास्त्रों का सार सीखा है, उसे प्रथम श्रेणी का शिक्षित व्यक्ति माना जाता है, जिसे सभी शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान है।
