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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  3.10.52 
जल - लीला क रि’ गोविन्द चलिला आलय ।
निज - गण लञा प्रभु गेला देवालय ॥52॥
 
 
अनुवाद
जल में अपनी लीलाएँ समाप्त करके, भगवान गोविंद अपने निवास स्थान पर लौट आए। फिर श्री चैतन्य महाप्रभु अपने सभी भक्तों को साथ लेकर मंदिर गए।
 
After finishing the water play, Lord Govinda returned to his abode. Sri Chaitanya Mahaprabhu then went to the temple with his devotees.
तात्पर्य
यहाँ जिन देवता का उल्लेख गोविंद के रूप में किया गया है, वे जगन्नाथ मंदिर में विजय-विग्रह हैं। जब जगन्नाथ को कहीं ले जाने की आवश्यकता होती है, तो विजय-विग्रह को इसलिए ले जाया जाता है क्योंकि जगन्नाथ का शरीर बहुत भारी होता है। जगन्नाथ मंदिर में विजय-विग्रह को गोविंद के नाम से जाना जाता है। नरेंद्र-सरोवर में लीलाओं के लिए भगवान जगन्नाथ के स्थान पर विजय-विग्रह को वहाँ ले जाया गया था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)