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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
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श्लोक 43
श्लोक
3.10.43
सेइ - काले महाप्रभु भक्त - गण - सङ्गे ।
नरेन्द्रे आइला देखिते जल - केलि - रङ्गे ॥43॥
अनुवाद
तब श्री चैतन्य महाप्रभु अपने निजी पार्षदों के साथ नरेन्द्र-सरोवर में भगवान जगन्नाथ की उल्लासमय लीला देखने के लिए आये।
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu came to Narendra Sarovar along with his personal companions to witness the joyful water sports of Lord Jagannatha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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