श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  3.10.34 
राघवेर आज्ञा, आर करेन दमयन्ती ।
दुँहार प्रभुते स्नेह परम - भकति ॥34॥
 
 
अनुवाद
दमयंती ने अपने भाई राघव पंडित की आज्ञा से ये सारी तैयारियाँ कीं। दोनों ही श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रति असीम स्नेह रखते थे और भक्ति में पारंगत थे।
 
Damayanti had prepared all these things at the behest of her brother Raghava Pandita. Both of them had immense love for Sri Chaitanya Mahaprabhu and were very advanced in devotion.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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