vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
»
श्लोक 153
श्लोक
3.10.153
गदाधर - पण्डित, भट्टाचार्य सार्वभौम ।
इँहा सबार आछे भिक्षार दिवस - नियम ॥153॥
अनुवाद
हर महीने गदाधर पंडित और सार्वभौम भट्टाचार्य ने तिथियां निश्चित कर रखी थीं, जिस दिन श्री चैतन्य महाप्रभु उनके निमंत्रण स्वीकार करते थे।
Gadadhara Pandit and Sarvabhauma Bhattacharya had fixed the dates when Sri Chaitanya Mahaprabhu would accept their invitation every month.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×