श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  3.10.144 
‘चैतन्य - दास’ नाम शुनि’ कहे गौर - राय ।
‘किबा नाम धरा ञाछ, बुझन ना याय’ ॥144॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने सुना कि उसका नाम चैतन्य दास है, तो उन्होंने कहा, "आपने इसे कैसा नाम दिया है? यह समझना बहुत कठिन है।"
 
When Mahaprabhu heard that his name was Chaitanya Das, he said, "What kind of name have you given him? It is very difficult to understand."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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