श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 135-136
 
 
श्लोक  3.10.135-136 
मरिचेर झाल, आर मधुराम्ल आर ।
आदा, लवण, लेम्बु, दुग्ध, दधि, खण्ड - सार ॥135॥
शाक दुइ - चारि, आर सुकुतार झोल ।
निम्ब - वार्ताकी, आर भृष्ट - पटोल ॥136॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने काली मिर्च से बने तीखे व्यंजन, मीठे-खट्टे व्यंजन, अदरक, नमकीन व्यंजन, नींबू, दूध, दही, मिश्री, दो या चार प्रकार के पालक, कड़वे तरबूज से बना सूप, नींबू के पत्तों के साथ मिला हुआ बैंगन, तथा तले हुए पटोला आदि व्यंजन पेश किए।
 
He gave them spicy dishes made from black pepper, sweet and sour dishes, ginger, salty snacks, lemon, milk, curd, cheese, two-four types of vegetables, soup made from Sukuta, brinjal mixed with neem flowers and fried Patol to eat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)