vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
»
श्लोक 134
श्लोक
3.10.134
मध्ये मध्ये आचा र्यादि करे निमन्त्रण ।
घरे भात रान्धे आर विविध व्यञ्जन ॥134॥
अनुवाद
समय-समय पर अद्वैत आचार्य और अन्य लोग श्री चैतन्य महाप्रभु को घर में पकाए गए चावल और विभिन्न प्रकार की सब्जियों के लिए आमंत्रित करते थे।
From time to time, Advaita Acharya and other devotees would invite Sri Chaitanya Mahaprabhu to eat home-cooked rice and various types of vegetables.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×