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श्लोक 3.10.127  |
शत - जनेर भक्ष्य प्रभु दण्डेके खाइला! ।
‘आर किछु आछे?’ बलि’ गोविन्दे पुछिला ॥127॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु ने कुछ ही देर में सौ लोगों के लिए पर्याप्त भोजन खा लिया। फिर उन्होंने गोविंद से पूछा, "क्या कुछ और बचा है?" |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu ate enough food for a hundred people in a short time. Then he asked Govinda, “Is there anything left?” |
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