vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 3: अन्त्य लीला
»
अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
»
श्लोक 122
श्लोक
3.10.122
श्रीमान् सेन, श्रीमान् पण्डित, आचार्य - नन्दन ।
ताँ - सबार दत्त एइ करह भोजन ॥122॥
अनुवाद
ये श्रीमान सेना, श्रीमान पंडित और नंदन आचार्य द्वारा दिए गए उपहार हैं। कृपया इन्हें खाएँ।
These gifts have been given by Mr. Sen, Mr. Pandit, and Acharya Nandan. Please eat them all.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas