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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  3.10.116 
प्रभु कहे, - ‘आदि - वस्या’ दुःख काँहे माने? ।
केबा कि दियाछे, ताहा आनह एखाने ॥116॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने उत्तर दिया, "तुम मूर्खतापूर्वक इतने दुखी क्यों हो? जो कुछ उन्होंने तुम्हें दिया है, उसे मेरे पास ले आओ।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu replied, "Why are you so sad like a fool? Bring me what those people gave you."
तात्पर्य
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर ने बताया कि आदि-वसया शब्द का अर्थ है वह जो एक ही जगह कई सालों से रह रहा है | गोविंदा को आदि वास्या इसलिए कहा गया क्योंकि वह श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ कई सालों से रह रहे थे जबकि नए भक्त आते जाते रहते थे | भगवान ने गोविंदा से कहा " तुम चूँकि कई सालों से मेरे साथ रह रहे हो तो ऐसी मूर्खतापूर्ण निराशा तुमको नहीं रखनी चाहिए | सारा खाना मेरे पास लेकर आओ तब तुम देखोगे कि मैं सब खा सकता हूँ |"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)