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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 3: अन्त्य लीला
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अध्याय 10: श्री चैतन्य महाप्रभु अपने भक्तों से प्रसाद ग्रहण करते हैं
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श्लोक 112
श्लोक
3.10.112
गोविन्देरे सबे पुछे करिया यतन ।
‘आमा - दत्त प्रसाद प्रभुरे कि कराइला भक्षण? ॥112॥
अनुवाद
सभी भक्तों ने बड़ी उत्सुकता से गोविंद से पूछा, "क्या आपने श्री चैतन्य महाप्रभु को मेरा लाया हुआ प्रसाद दे दिया है?"
All the devotees would eagerly ask Govinda, “Did you give the Prasad brought by me to Sri Chaitanya Mahaprabhu?”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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