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श्लोक 3.10.107  |
पूर्वे यदि गौड़ ह - इते भक्त - गण आइल ।
प्रभुरे किछु खाओयाइते सबार इच्छा हैल ॥107॥ |
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| अनुवाद |
| पूर्वकाल में जब बंगाल से सभी भक्तगण आये थे, तो उन सबने श्री चैतन्य महाप्रभु को कुछ खाने को देने की इच्छा व्यक्त की थी। |
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| Earlier, when all the devotees had come from Bengal, they wanted to give something to eat to Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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