श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 3: अन्त्य लीला  »  अध्याय 1: महाप्रभु से श्रील रूप गोस्वामी की द्वितीय भेट  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  3.1.80 
ताल - पत्रे श्लोक लिखि’ चालेते राखिला ।
समुद्र - स्नान करिबारे रूप - गोसाञि गेला ॥80॥
 
 
अनुवाद
इस श्लोक को ताड़ के पत्ते पर लिखकर रूप गोस्वामी ने उसे अपनी छप्पर की छत पर रख दिया और समुद्र में स्नान करने चले गये।
 
After writing this verse on a palm leaf, Rupa Goswami placed it somewhere on the roof of his hut and went to take a bath in the sea.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)