''यस्य देवे परा भक्ति यथा देवे तथा गुरौ।।''
''तस्यैते कथिता ह्यार्थाः प्रकाशते महात्मनः।।'' (श्वेताश्वतर उप. 6.23)
वास्तव में भगवत गीता या श्रीमद् भागवतम् के शब्दों का अर्थ उस व्यक्ति को पता चलता है जो आध्यात्मिक गुरु के आदेशों का कड़ाई से पालन करता है। वे उन लोगों को भी पता चलते हैं जिनकी ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व में समान आस्था है। दूसरे शब्दों में, कृष्ण और आध्यात्मिक गुरु दोनों के प्रति वफादार होना आध्यात्मिक जीवन में सफलता का रहस्य है।
