श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 93
 
 
श्लोक  2.9.93 
सेइ क्षेत्रे रहे एक वैष्णव - ब्राह्मण ।
देवालये आ सि’ करे गीता आवर्तन ॥93॥
 
 
अनुवाद
श्रीरंगक्षेत्र के पवित्र स्थान में एक ब्राह्मण वैष्णव प्रतिदिन मंदिर में आते थे और भगवद्गीता का संपूर्ण पाठ करते थे।
 
In Sri Rangakshetra, a Brahmin Vaishnav used to come daily to visit the temple and recite the entire Bhagavad Gita.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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