श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.9.86 
ताँर घरे रहिला प्रभु कृष्ण - कथा - रसे ।
भट्ट - सङ्गे गोङाइल सुखे चारि मासे ॥86॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु लगातार चार महीने तक वेंकट भट्ट के घर पर रहे। भगवान ने भगवान कृष्ण की लीलाओं की चर्चा करते हुए, परम सुख में अपना समय बिताया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu stayed at Venkata Bhatta's home for four consecutive months. Mahaprabhu spent his days happily narrating the pastimes of Lord Krishna and savoring the divine essence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)