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अनुवाद
श्यालि-भैरवी [देवी दुर्गा का एक रूप] के मंदिर में दर्शन करने के बाद, माता शची के पुत्र श्री चैतन्य महाप्रभु कावेरी नदी के तट पर गए।
After visiting the Shiyali Bhairavi (another form of Durgadevi) temple, Shachidevi's son Sri Chaitanya Mahaprabhu went to the banks of the Kaveri River.
तात्पर्य
श्यामली-भैरवी का मंदिर तंजावुर जिले में स्थित है, जो तंजावुर शहर से लगभग अड़तालीस मील दूर पूर्वोत्तर में है। वहाँ भगवान शिव का एक बहुत प्रसिद्ध मंदिर है, साथ ही एक बहुत बड़ी झील भी है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार भगवान शिव के भक्त एक छोटे लड़के के रूप में उस मंदिर में आए थे और भैरवी के रूप में जानी जाने वाली देवी दुर्गा ने उसे अपना स्तन चूसने दिया। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद, श्री चैतन्य महाप्रभु तिरुचिरापल्ली जिले से होते हुए कावेरी (कोलिरन) नदी के तट पर गए। श्रीमद्-भागवतम (11.5.40) में कावेरी का उल्लेख एक बहुत ही पवित्र नदी के रूप में किया गया है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥