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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  2.9.73 
श्वेत - वराह देखि, ताँरे नमस्क रि’ ।
पीताम्बर - शिव - स्थाने गेला गौरहरि ॥73॥
 
 
अनुवाद
वृद्धकोला में, भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्वेत वराह अवतार, श्वेत वराह के मंदिर में दर्शन किए। उन्हें प्रणाम करने के बाद, भगवान शिव के मंदिर गए, जहाँ भगवान शिव पीले वस्त्र धारण किए हुए थे।
 
At Vriddhakool, Sri Chaitanya Mahaprabhu saw the temple of Lord Shvetvaraha. After paying his respects, Mahaprabhu went to the temple of Lord Shiva, where the Deity is dressed in yellow.
तात्पर्य
सफ़ेद सूअर अवतरण का मंदिर वृद्धकोला अर्थात श्री मुष्णम में स्थित है। मंदिर पत्थर का है और बालिपीठम नामक नखलिस्तान से लगभग एक मील दक्षिण में स्थित है। वहाँ सफ़ेद सूअर अवतरण का देव है जिसके ऊपर शेष नाग छत्र का कार्य करता है।

यहाँ वर्णित भगवान शिव का मंदिर पीताम्बर या चिदम्बरम में स्थित है, जो कडलोर से छब्बीस मील दक्षिण में स्थित है। वहाँ भगवान शिव का देव आकाशलिंग नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर लगभग तैंतालीस एकड़ भूमि पर स्थित है, और यह सारी भूमि एक दीवार और एक ऐसे रास्ते से घिरी हुई है जो लगभग साठ फुट चौड़ा है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)