Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  2.9.72 
पक्षि - तीर्थ दे खि’ कैल शिव दरशन ।
वृद्धकोल - तीर्थे तबे करिला गमन ॥72॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने पक्षी-तीर्थ में भगवान शिव के मंदिर में दर्शन किए। तत्पश्चात वे वृद्धकोल तीर्थस्थल गए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu saw the temple of Lord Shiva in Pakshitirtha. Then he went to Vridhakola pilgrimage.
तात्पर्य
पक्षी-तीर्थ, जिसे तिरुकड़ी-कुंडम भी कहा जाता है, चिंपलिपट के दक्षिण-पूर्व में नौ मील की दूरी पर स्थित है। यह पाँच सौ फ़ुट की ऊँचाई पर है और वेदगिरि या वेदांचल के नाम से जानी जाने वाली पहाड़ियों की एक शृंखला में स्थित है। वहाँ भगवान शिव का एक मंदिर है, और देवता को वेदगिरीश्वर के रूप में जाना जाता है। दो पक्षी वहाँ प्रतिदिन मंदिर के पुजारी से भोजन प्राप्त करने आते हैं, और यह दावा किया जाता है कि वे अनादि काल से आ रहे हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)