पक्षि - तीर्थ दे खि’ कैल शिव दरशन ।
वृद्धकोल - तीर्थे तबे करिला गमन ॥72॥
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अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने पक्षी-तीर्थ में भगवान शिव के मंदिर में दर्शन किए। तत्पश्चात वे वृद्धकोल तीर्थस्थल गए।
Sri Chaitanya Mahaprabhu saw the temple of Lord Shiva in Pakshitirtha. Then he went to Vridhakola pilgrimage.
तात्पर्य
पक्षी-तीर्थ, जिसे तिरुकड़ी-कुंडम भी कहा जाता है, चिंपलिपट के दक्षिण-पूर्व में नौ मील की दूरी पर स्थित है। यह पाँच सौ फ़ुट की ऊँचाई पर है और वेदगिरि या वेदांचल के नाम से जानी जाने वाली पहाड़ियों की एक शृंखला में स्थित है। वहाँ भगवान शिव का एक मंदिर है, और देवता को वेदगिरीश्वर के रूप में जाना जाता है। दो पक्षी वहाँ प्रतिदिन मंदिर के पुजारी से भोजन प्राप्त करने आते हैं, और यह दावा किया जाता है कि वे अनादि काल से आ रहे हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥