पूर्ववत्पथे याइते ये पाय दरशन ।
येइ ग्रामे याय, से ग्रामेर यत जन ॥7॥
सबेइ वैष्णव हय, कहे ‘कृष्ण’ ‘हरि’ ।
अन्य ग्राम निस्तारये सेइ ‘वैष्णव’ करि’ ॥8॥
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अनुवाद
जैसा कि पहले कहा गया है, भगवान चैतन्य जिन-जिन गाँवों में गए, वहाँ के सभी निवासी वैष्णव बन गए और हरि और कृष्ण का कीर्तन करने लगे। इस प्रकार, भगवान जिन-जिन गाँवों में गए, वहाँ के सभी लोग वैष्णव, भक्त बन गए।
As mentioned earlier, in every village that Lord Chaitanya Mahaprabhu visited, all the residents became Vaishnavas and began chanting the names Hari and Krishna. Thus, in every village that Mahaprabhu visited, everyone became a Vaishnava devotee.
तात्पर्य
कृष्ण और हरि के पवित्र नाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जप इतना अधिकाधिक आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली है कि आज भी, जब हमारे उपदेशक दुनिया के सुदूर इलाकों में जाते हैं, तो लोग तुरंत हरे कृष्ण का जप करना शुरू कर देते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व थे। ऐसा कोई नहीं हो सकता जो उनकी या उनकी शक्तियों की तुलना कर सके। हालाँकि, क्योंकि हम उनके नक्शेकदम पर चल रहे हैं और हरे कृष्ण महामंत्र का भी जप कर रहे हैं, इसलिए प्रभाव लगभग उतना ही शक्तिशाली है जितना कि भगवान चैतन्य महाप्रभु के समय में था। हमारे प्रचारक मुख्य रूप से यूरोपीय और अमेरिकी देशों से संबंधित हैं, फिर भी भगवान चैतन्य की कृपा से उन्हें जब भी वे शाखाएँ खोलने जाते हैं, उन्हें जबरदस्त सफलता मिलती है। वास्तव में, हर जगह लोग बहुत गंभीरता से हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे / हरे रामा, हरे रामा, रामा रामा, हरे हरे का जप कर रहे हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥