Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु जहाँ भी गए, उनके प्रभाव ने सभी को चकित कर दिया। इसके बाद वे पान-नृसिंह के मंदिर पहुँचे। भगवान अत्यंत दयालु हैं।
Wherever Sri Chaitanya Mahaprabhu went, everyone was astonished by his influence. Then he came to the Pana-Nrisimha Temple. Mahaprabhu is so compassionate.
तात्पर्य
पान-नृसिंहा, या पानकाला-नारसिंहा, कृष्णा जिले में मंगलगिरि नामक पहाड़ियों में स्थित है, जो विजयवाड़ा नामक शहर से लगभग सात मील की दूरी पर है। मंदिर तक पहुंचने के लिए छह सौ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कहा जाता है कि जब भगवान को यहाँ चाशनी के साथ भोजन चढ़ाया जाता है, तो वे आधे से अधिक नहीं लेते हैं। इस मंदिर के अंदर तंजौर के दिवंगत राजा द्वारा भेंट किया गया एक शंख है, और कहा जाता है कि इस शंख का उपयोग स्वयं भगवान कृष्ण ने किया था। मार्च के महीने में इस मंदिर में एक महान मेला लगता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥