श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  2.9.64 
महाप्रभु चलि’ आइला त्रिपति - त्रिमल्ले ।
चतुर्भुज मूर्ति देखि’ व्येङ्कटाद्र्ये चले ॥64॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु इसके बाद तिरुपति और तिरुमला पहुँचे, जहाँ उन्होंने एक चतुर्भुजी विग्रह के दर्शन किए। फिर वे वेंकट पर्वत की ओर बढ़े।
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu came to Tirupati and Tirumala, where he saw the four-armed idol. After that he started towards Mount Venkata.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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