पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति
तदहं भक्त्युपहृतं अश्नामि प्रयतात्मनः
"यदि कोई मुझे प्रेम और भक्ति से एक पत्र, एक फूल, एक फल या पानी अर्पित करता है, तो मैं उसे स्वीकार करूंगा।" कृष्ण अपने भक्त द्वारा भक्ति के साथ अर्पित की गई किसी भी चीज़ को स्वीकार कर सकते हैं। एक अवैष्णव शाकाहारी और बहुत साफ-सुथरा रसोइया हो सकता है, लेकिन क्योंकि वह विष्णु को भोजन अर्पित नहीं कर सकता, इसे महाप्रसाद के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। बेहतर है कि एक वैष्णव ऐसे भोजन को अछूत के रूप में त्याग दे।
