Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.9.51 
दार्शनिक पण्डित सबाइ पाइल पराजय ।
लोके हास्य करे, बौद्ध पाइल लज्जा - भय ॥51॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने सभी मानसिक विचारकों और विद्वानों को पराजित कर दिया, और जब लोग हंसने लगे, तो बौद्ध दार्शनिकों को शर्म और भय दोनों का अनुभव हुआ।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu defeated all the intellectual thinkers and scholars, and when people started laughing at the Buddhist philosophers, they felt both shame and fear.
तात्पर्य
ये सभी दार्शनिक नास्तिक थे, क्योंकि वे ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते थे। नास्तिक मानसिक अटकलों में बहुत ही निपुण हो सकते हैं और वे स्वयं को महान दार्शनिक कह सकते हैं, परन्तु उन्हें एक वैष्णव हरा सकता है जो अपनी आस्था और ईश्वर चेतना में मजबूती से जड़ा है। श्री चैतन्य महाप्रभु के चरणों का अनुसरण करते हुए, ISKCON की सेवा में लगे सभी उपदेशकों को सभी प्रकार के नास्तिकों को हराने और उग्र तर्क प्रस्तुत करने में बहुत निपुण होना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)