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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.9.4 
सेइ सब तीर्थ स्प र्शि’ महा - तीर्थ कैल ।
सेइ छले सेइ देशेर लोक निस्तारिल ॥4॥
 
 
अनुवाद
उन सभी पवित्र स्थानों के दर्शन करने के बहाने, प्रभु ने हजारों निवासियों का धर्म परिवर्तन किया और इस प्रकार उनका उद्धार किया। पवित्र स्थानों को स्पर्श मात्र से ही, उन्होंने उन्हें महान तीर्थस्थल बना दिया।
 
Under the pretext of visiting these holy places, he transformed the hearts of thousands of residents and thus brought them salvation. He transformed them into great pilgrimage sites with just his touch.
तात्पर्य
कहा जाता है, तीर्थी-कुर्वन्ति तीर्थानिl। तीर्थ, या पवित्र स्थान, वह स्थान है जहां महापुरुषों का आगमन या निवास होता है। यद्यपि ये पवित्र स्थान पहले से ही तीर्थस्थल थे, फिर भी श्री चैतन्य महाप्रभु के आगमन से ये सभी पवित्र हुए। अनेक लोग इन पवित्र स्थानों की यात्रा करके वहां अपने पाप कर्मों को छोड़ देते हैं और इस प्रकार दूषित होने से मुक्त हो जाते हैं। जब ये दोष अधिक हो जाते हैं, तो श्री चैतन्य महाप्रभु और उनके कठोर अनुयायियों के आगमन से उनका निराकरण हो जाता है। अनेक प्रकार के रोगी अस्पताल आते हैं, जो विभिन्न प्रकार के रोगों से संक्रमित हो सकता है। दरअसल, अस्पताल हमेशा संक्रमित रहता है, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी विशेषज्ञ उपस्थिति और प्रबंधन से अस्पताल को कीटाणुरहित रखते हैं। इसी प्रकार, तीर्थस्थल हमेशा वहां आने वाले पापियों द्वारा छोड़े गए पापों से संक्रमित रहते हैं, लेकिन जब श्री चैतन्य महाप्रभु जैसे व्यक्तित्व ऐसे स्थान पर पधारते हैं, तो सभी दोष दूर हो जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)