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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  2.9.38 
ताँरे कृपा करि’ प्रभु चलिला आर दिने ।
वृद्धकाशी आसि’ कैल शिव - दरशने ॥38॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण पर दया करके, भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु अगले दिन वहां से चले गए और वृद्धकाशी पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का दर्शन किया।
 
Showing mercy to that Brahmin, Sri Chaitanya Mahaprabhu left the next day and came to Vriddhakoshi, where he visited the temple of Lord Shiva.
तात्पर्य
वृद्धाकाशी का वर्तमान नाम वृद्धचालम है। यह दक्षिणी आर्कॉट जिले में स्थित है, मणिमुख नदी के तट पर। इस स्थान को कालाहस्तिपुर के नाम से भी जाना जाता है। वहां भगवान शिव के मंदिर की पूजा रामायणुजाचार्य के चचेरे भाई गोविंदा ने कई वर्षों तक की थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)