तीर्थ - यात्रा - कथा एइ कैलुँ समापन ।
सङ्क्षेपे कहिलुँ, विस्तार ना याय वर्णन ॥358॥
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अनुवाद
इस प्रकार मैंने श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्रा का संक्षिप्त वर्णन करके अपनी कथा समाप्त की है। इसका बहुत व्यापक वर्णन नहीं किया जा सकता।
Thus I have briefly completed the description of Sri Chaitanya Mahaprabhu's pilgrimage. It cannot be described in any further detail.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर इंगित करते हैं कि इस अध्याय के चौहत्तरवें श्लोक में कहा गया है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने शियाली-भैरवी के मंदिर का दौरा किया, लेकिन वास्तव में शियाली में श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्री भू-वराह के मंदिर का दौरा किया था। शियाली और चिदंबरम के पास एक मंदिर है जिसे श्री मुष्णम के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में श्री भू-वराह की एक देवता है। चिदंबरम के क्षेत्राधिकार में एक जिला है जिसे दक्षिणी आरकाट के नाम से जाना जाता है। शियाली शहर उस जिले में है। पास में श्री भू-वराहदेव का मंदिर है, भैरवी-देवी का नहीं। यह श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर का निष्कर्ष है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥