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श्लोक 2.9.345  |
प्रेमावेशे सार्वभौम करिला रोदने ।
सबा - सङ्गे आइला प्रभु ईश्वर - दरशने ॥345॥ |
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| अनुवाद |
| सार्वभौम भट्टाचार्य बड़े प्रेम से आह्लादित होकर रो पड़े। फिर भगवान् उन सबके साथ जगन्नाथ के मंदिर में गए। |
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| Sarvabhauma Bhattacharya wept with intense love. Then Mahaprabhu went with everyone to the Jagannath Temple. |
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