श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 323
 
 
श्लोक  2.9.323 
तीर्थ - यात्रा - कथा प्रभु सकल कहिला ।
कर्णामृत, ब्रह्म - संहिता, - दुइ पुँथि दिला ॥323॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने रामानंद राय को अपने तीर्थस्थानों की यात्राओं का विशद वर्णन दिया और बताया कि कैसे उन्होंने कृष्ण-कर्णामृत और ब्रह्म-संहिता नामक दो ग्रंथ प्राप्त किए। भगवान ने ये ग्रंथ रामानंद राय को सौंप दिए।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu narrated to Ramananda Raya a beautiful account of his journey to the places of pilgrimage and told him how he obtained two texts named Krishnakarnamrit and Brahma-Samhita. Mahaprabhu gave both the books to Ramanand Rai.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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