तीर्थ - यात्रा - कथा प्रभु सकल कहिला ।
कर्णामृत, ब्रह्म - संहिता, - दुइ पुँथि दिला ॥323॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने रामानंद राय को अपने तीर्थस्थानों की यात्राओं का विशद वर्णन दिया और बताया कि कैसे उन्होंने कृष्ण-कर्णामृत और ब्रह्म-संहिता नामक दो ग्रंथ प्राप्त किए। भगवान ने ये ग्रंथ रामानंद राय को सौंप दिए।
Sri Chaitanya Mahaprabhu narrated to Ramananda Raya a beautiful account of his journey to the places of pilgrimage and told him how he obtained two texts named Krishnakarnamrit and Brahma-Samhita. Mahaprabhu gave both the books to Ramanand Rai.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥