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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 316
 
 
श्लोक  2.9.316 
प्रभु आसि’ कैल पम्पा - सरोवरे स्नान ।
पञ्चवटी आसि, ताहाँ करिल विश्राम ॥316॥
 
 
अनुवाद
अंततः श्री चैतन्य महाप्रभु पम्पा नामक सरोवर पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने स्नान किया। तत्पश्चात वे पंचवटी नामक स्थान पर गए, जहाँ उन्होंने विश्राम किया।
 
Finally, Sri Chaitanya Mahaprabhu came to a lake called Pampa, where he bathed. He then went to Panchavati, where he rested.
तात्पर्य
कुछ लोगों के अनुसार, तुंगभद्रा नदी का पुराना नाम पंभा था। अन्य लोगों के अनुसार, राज्य की राजधानी विजयनगर, पंपतिर्थ के रूप में जानी जाती थी। कुछ अन्य लोगों के अनुसार, हैदराबाद की दिशा में, अनागुंडी के पास की झील पंपा-सरोवर है। वहाँ से होकर तुंगभद्रा नदी भी बहती है। पंपा-सरोवर नामक झील को लेकर कई तरह के मतभेद हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)