श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  2.9.282 
तथा हैते पाण्डरपुरे आइला गौरचन्द्र ।
विठ्ठल - ठाकुर देखि’ पाइला आनन्द ॥282॥
 
 
अनुवाद
वहां से श्री चैतन्य महाप्रभु पंडारापुरा गए, जहां उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक विट्ठल ठाकुर का मंदिर देखा।
 
From there Sri Chaitanya Mahaprabhu went to Pandharpur, where he happily saw the temple of Vitthal Thakur.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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