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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 281
 
 
श्लोक  2.9.281 
कोलापुरे लक्ष्मी देखि’ देखेन क्षीर - भगवती ।
लाङ्ग - गणेश दे खि’ देखेन चोर - पार्वती ॥281॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद श्री चैतन्य महाप्रभु कोलापुर नगर गए, जहां उन्होंने क्षीर-भगवती मंदिर में भाग्य की देवी के दर्शन किए तथा कोर-पार्वती नामक एक अन्य मंदिर में लांग-गणेश के दर्शन किए।
 
After this, Sri Chaitanya Mahaprabhu went to a town called Kolhapur, where he saw Lakshmiji in the temple of Kshir Bhagwati and Lang Ganesha in another temple called Chor Parvati.
तात्पर्य
कोल्हापुर महाराष्ट्र प्रांत का एक शहर है, जिसे पहले बॉम्बे प्रांत के नाम से जाना जाता था। पहले कोल्हापुर एक देशी राज्य था, और यह उत्तर में सांगली जिले से, पूर्व और दक्षिण में बेलागाम जिले से, और पश्चिम में रत्नागिरी जिले से घिरा हुआ है। कोल्हापुर में उर्णा नाम की एक नदी है। बॉम्बे गजट से पता चलता है कि वहाँ लगभग 250 मंदिर थे, जिनमें से छह बहुत प्रसिद्ध हैं। ये हैं (1) अंबाबाई, या महालक्ष्मी मंदिर, (2) विठोबा मंदिर, (3) टेम्बलाई मंदिर, (4) महाकाली मंदिर, (5) फिरंगी, या प्रत्यंगिरा मंदिर, और (6) यल्लाम्मा मंदिर।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)