गोकर्णे शिव दे खि’ आइला द्वैपायनि ।
सूर्पारक - तीर्थे आइला न्यासि - शिरोमणि ॥280॥
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अनुवाद
पंचाप्सरा के दर्शन के बाद श्री चैतन्य महाप्रभु गोकर्ण गये। वहाँ रहते हुए, उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का दौरा किया, और फिर वे द्वैपायनी के पास गये। श्री चैतन्य महाप्रभु, सभी संन्यासियों के मुकुटमणि, फिर सुरपरक-तीर्थ गए।
After meeting Panchaprasa, Sri Chaitanya Mahaprabhu went to Gokarna. There he visited the Shiva temple and then went to Dwaipayani. Then, Sri Chaitanya Mahaprabhu, the best of ascetics, went to Surparaka Tirtha.
तात्पर्य
गोकार्न कर्नाटक राज्य के उत्तर कन्नड़ में स्थित है। यह कारवार से लगभग तैंतीस मील दक्षिण-पूर्व में है। यह स्थान भगवान शिव के महाबलेश्वर नामक मंदिर के लिए बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर को देखने के लिए हजारों-लाखों तीर्थयात्री आते हैं।
सूपारक, बॉम्बे से लगभग छब्बीस मील उत्तर में है। महाराष्ट्र प्रांत में, बॉम्बे के पास, ठाणे नामक एक जिला और सोपारा नामक एक स्थान है। महाभारत में (शांति-पर्व, अध्याय 41, श्लोक 66-67) में सूपारक का उल्लेख मिलता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥