जब पाँच अप्सराएँ अच्युत ऋषि का ध्यान भंग करने गईं, तो उन सभी को संत ने शाप दिया था। परिणामस्वरूप, लड़कियाँ एक झील में मगरमच्छों में बदल गईं, जिसे पंचाप्सरा के नाम से जाना जाने लगा। भगवान रामचंद्र ने भी इस स्थान का दौरा किया था। श्री नारद मुनि के वर्णन से, यह समझा जाता है कि जब अर्जुन पवित्र स्थानों की यात्रा करने गए, तो उन्हें पांच अप्सराओं की निंदा के बारे में पता चला। उन्होंने उन्हें उनकी घृणित स्थिति से मुक्त किया, और उस दिन से पंचाप्सरा नामक झील तीर्थ स्थल बन गया।
