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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 9: श्री चैतन्य महाप्रभु की तीर्थयात्राएँ  »  श्लोक 225
 
 
श्लोक  2.9.225 
तमाल - कार्तिक दे खि’ आइल वेतापनि ।
रघुनाथ देखि’ ताहाँ वञ्चि ला रजनी ॥225॥
 
 
अनुवाद
मल्लार देश की यात्रा के बाद, चैतन्य महाप्रभु तमालकार्तिक और फिर वेतापानी गए। वहाँ उन्होंने रघुनाथ भगवान रामचंद्र के मंदिर के दर्शन किए और रात्रि विश्राम किया।
 
After touring the Mallar country, Mahaprabhu went to Tamalakarthika, and from there went to Vetapani. There he saw the temple of Raghunath i.e. Ramchandra and spent the night there.
तात्पर्य
तमालकार्तिक तिरुनेल्वेली से 44 मील दक्षिण और अरमवल्ली पर्वत से दो मील दक्षिण में है। यह तोवलाई के अधिकार क्षेत्र में स्थित है। तमालकार्तिक में सुब्रह्मण्य, या भगवान कार्तिक, भगवान शिव के पुत्र का एक मंदिर है।

वेतापनी, या वातापाणी, तमिलनाडु राज्य में कैला के उत्तर में है। इसे भूतपंडी के नाम से भी जाना जाता है और यह तोबाला जिले के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह समझा जाता है कि पहले वहां भगवान रामचंद्र का देवता था। बाद में देवता को भगवान शिव के देवता के साथ बदल दिया गया जिसे रामेश्वर या भूतानाथ के नाम से जाना जाता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)